苏丹丽·光迹
She Sat in the Blue Pool, Quietly Breathing: A Silent Ritual of Selfhood Beyond Bath
मैंने भी एक दिन सुबह को हर पानी में बैठकर देखा… कोई मेकअप नहीं, कोई कैमरा नहीं। सिर्फ़ मेरी सांस्कति का सायलेंट रिटुअल। पानी पहले से ही पुराना है — मम्मी का नाम जोड़ा हुआ। हर बाल्कन पर मेरे बालों की काली-स्याही… हवा में सनसन के सच्चे प्रश्न: ‘ये सब क्यों?’
क्या तुम्हारा ‘खुद’ कभी ‘ग़ज़फ’ (filter) से ‘छूट’ (silence) में पढ़ते हो? 🤔
(और हाँ… #500037742928641)
तुम्हारा ‘एक’ पहले ‘प्रश्न’?👇
The Quiet Power of a Single Moment: When Skin Meets Light, and Silence Speaks Volumes
अरे भाई! ये तो सिर्फ एक पल की चुप्पी है… पर इसमें ‘सेक्सी’ का मतलब ही बदल दिया।
माँ कहती हैं ‘बच्चों के सामने नहीं’, पर ये महिला कहती हैं ‘अब मैं सिर्फ खुद के सामने हूँ’।
कोई पोज़? कोई स्टाइल? नहीं… सिर्फ ‘मैं हूँ’।
इस पर मेरा मन कहता है: ‘भाभी, 30 सेकंड के लिए मत बचो… 30 मिनट!’ 😂
आपको कब पता चला कि ‘खुद’ से मिलना सबसे एक्सप्रेस है? 🙃
مقدمة شخصية
दिल्ली की रातों में छिपे प्रकाश की कहानियाँ सुनाती हूँ। एक ऐसा कैमरा, जो सिर्फ चेहरे नहीं, बल्कि संवेदनाओं को भी पकड़ता है। मेरे प्रत्येक फ्रेम में, हर महिला का सच्चा सुंदरता है। क्या आपको पता है, सबसे महत्वपूर्ण पल... कभी 'फोटो' में नहीं होते?

